MP की 4 फसलों को मिला GI Tag, किसानों की बल्ले-बल्ले
🌾 Category: किसान योजना, Latest Update | 🗓️ Updated: 29 June 2026
SarkariYojanaMP.com पर आपका स्वागत है। जून 2026 में मध्य प्रदेश के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश की 4 पारंपरिक और खास कृषि उपजों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है। जनसम्पर्क विभाग (MP Info) की ताज़ा अपडेट के अनुसार, इस कदम से महाकौशल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के किसानों को अपनी फसलों का बेहतर दाम मिल सकेगा।
किन 4 कृषि उपजों को मिला GI Tag?
हाल ही में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जबलपुर) के तकनीकी सहयोग और राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के लगातार प्रयासों से मध्य प्रदेश की निम्नलिखित चार पारंपरिक फसलों को कानूनी संरक्षण (GI Tag) प्राप्त हुआ है:
- सिताही कुटकी (Sitahi Kutki): यह 'लिटिल मिलेट' (छोटा बाजरा) की एक देशी किस्म है। यह मात्र 60 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और सूखा-रोधी (Drought-resistant) होने के कारण कम पानी वाले और प्रतिकूल मौसम में भी अच्छी पैदावार देती है।
- नागदमन कुटकी (Nagdaman Kutki): यह डिंडोरी जिले और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों की एक विशिष्ट कुटकी किस्म है, जो अपने अनोखे औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है।
- बैगानी अरहर (Baigani Arhar): यह तुअर दाल (अरहर) की एक विशेष और दुर्लभ किस्म है, जिसमें हल्की बैंगनी रंग की झलक होती है। इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है और इसका स्वाद भी काफी मधुर होता है।
- छत्रिय धान (Chhatriya Dhan): जबलपुर और कटनी के आर्द्रभूमि (wetland) क्षेत्रों में उगाई जाने वाली यह धान की एक सुगंधित पारंपरिक किस्म है। यह स्वाद के साथ-साथ विटामिन B1 से भी भरपूर मानी जाती है।
किसानों को GI Tag मिलने से क्या फायदे होंगे?
किसी भी उत्पाद को GI (Geographical Indication) टैग मिलना एक गर्व की बात होती है। इससे हमारे किसानों को कई बड़े फायदे होंगे:
- ब्रांड वैल्यू और कानूनी संरक्षण: इन चारों फसलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान (Brand Value) मिलेगी। अब कोई और राज्य या क्षेत्र इन नामों से नकली फसल नहीं बेच सकेगा।
- बेहतर मूल्य (Premium Price): चूंकि यह फसलें अब 'विशिष्ट' श्रेणी में आ गई हैं, इसलिए किसानों को बाज़ार में अपनी उपज का आम फसलों के मुकाबले ज्यादा अच्छा और प्रीमियम भाव मिलेगा।
- निर्यात के बढ़ते अवसर: GI टैग प्राप्त उत्पादों की विदेशों में भारी मांग होती है। इससे राज्य के आदिवासी और छोटे किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के दरवाज़े खुलेंगे।
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इन 4 फसलों के अलावा, हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर के मालवी आलू, रतलाम के गराडू और बालम ककड़ी को भी GI टैग मिल चुका है। यह राज्य सरकार और कृषि विभाग की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
किसानों के लिए राज्य सरकार अन्य योजनाएं भी चला रही है, जैसे भावांतर भुगतान योजना 2026 जिसके तहत सोयाबीन किसानों को MSP का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत भी ₹2000 की किस्त किसानों के खाते में भेजी जा रही है।
आधिकारिक जानकारी के लिए
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🌐 MP Info Portalअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. मध्य प्रदेश की किन 4 फसलों को हाल ही में GI Tag मिला है?
जून 2026 में सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर और छत्रिय धान को GI टैग प्रदान किया गया है।
Q2. सिताही कुटकी की क्या विशेषता है?
यह 'लिटिल मिलेट' की एक देशी किस्म है जो मात्र 60 दिनों में पक जाती है और यह सूखा-रोधी (Drought-resistant) है।
Q3. GI टैग मिलने से किसानों को मुख्य लाभ क्या है?
GI टैग से फसलों को एक विशेष ब्रांड वैल्यू मिलती है, जिससे किसानों को बाज़ार में ऊंचे दाम मिलते हैं और निर्यात के नए मौके खुलते हैं।